अगर आप पिछले कुछ समय से SSC (CGL, CHSL, GD) की तैयारी कर रहे हैं, तो आपने एक समस्या हमेशा देखी होगी—हजारों सीटें खाली रह जाना। अक्सर एक ही होनहार छात्र कई परीक्षाओं में टॉप करता है, जिससे वह एक सीट तो ले लेता है लेकिन बाकी सीटें बर्बाद हो जाती थीं।

Ssc Sliding System

​लेकिन 2026 से सब बदलने वाला है। SSC एक नया Sliding System (Fix & Float) लेकर आया है, जो उन छात्रों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो कुछ ही नंबरों से अपनी मनपसंद पोस्ट से चूक जाते थे।


​क्या है यह 'Fix' और 'Float' का चक्कर?

​अब जब आपका सिलेक्शन होगा, तो डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन (DV) के समय आपसे दो विकल्प पूछे जाएंगे:

  1. FIX (फिक्स): इसका मतलब है, "मुझे जो पोस्ट मिली है, मैं उससे खुश हूँ और मुझे आगे कोई बदलाव नहीं चाहिए।" एक बार आपने यह चुन लिया, तो आपकी सीट पक्की।
  2. FLOAT (फ्लोट): इसका मतलब है, "मुझे अभी यह पोस्ट मिली है, लेकिन अगर ऊपर वाली किसी अच्छी पोस्ट में जगह खाली होती है, तो मुझे वहां शिफ्ट कर दिया जाए।"

​यह सिस्टम काम कैसे करेगा? (एक उदाहरण से समझें)

​मान लीजिए आपको 'Auditor' की पोस्ट मिली है, लेकिन आपकी पहली पसंद 'Income Tax Inspector' थी। अगर आप Float चुनते हैं, और ऊपर रैंक वाला कोई छात्र वेरिफिकेशन में नहीं आता या अपनी सीट छोड़ देता है, तो वह सीट आपको मिल जाएगी।

​पुराने सिस्टम में वह सीट अगले साल के लिए खाली छोड़ दी जाती थी, लेकिन अब उसे उसी समय भर लिया जाएगा।

​कुछ जरूरी बातें जिनका ध्यान रखना होगा:

  • सिर्फ 10 दिन का समय: वेरिफिकेशन और अपना विकल्प चुनने के लिए आपको सिर्फ 10 दिन मिलेंगे। अगर आप आलस कर गए या तय समय पर नहीं पहुंचे, तो आपकी उम्मीदवारी रद्द कर दी जाएगी।
  • आधार वेरिफिकेशन जरूरी: अब आपको अपने रीजनल ऑफिस जाकर बायोमेट्रिक और आधार ऑथेंटिकेशन कराना होगा। इससे फर्जीवाड़ा पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
  • नो यू-टर्न: अगर फ्लोट चुनने के बाद आपको ऊपर वाली पोस्ट मिल गई, तो आपको वही लेनी होगी। आप बाद में यह नहीं कह सकते कि मुझे पुरानी वाली ही दे दो।

​छात्रों के लिए यह 'गेम चेंजर' क्यों है?

​सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब सीट ब्लॉकिंग नहीं होगी। जो छात्र केवल मजे के लिए या अपनी रैंक चेक करने के लिए एग्जाम देते थे और बाद में जॉइन नहीं करते थे, उनकी वजह से अब दूसरों का नुकसान नहीं होगा। यह एक तरह की 'वेटिंग लिस्ट' की तरह काम करेगा, जिससे कट-ऑफ में भी थोड़ी राहत मिल सकती है।

सावधान रहें: अब आपको अपनी 'Post Preference' बहुत सोच-समझकर भरनी होगी, क्योंकि एक गलत चुनाव आपको उस पोस्ट पर भेज सकता है जिसे आप शायद नहीं चाहते थे।